Sunday, September 24, 2017

परिवार का पहला इंजिनियर

परिवार का पहला इंजिनियर होना पहली बार मे इतना सुखद लगता है की जैसे राहुल गाँधी को अमित शाह ने नेक्स्ट प्रधान मंत्री कॅंडिडेट घोषित कर दिया हो.

ये उस दौर की बात है जब भारत के भविष्या
रण बांकुरे चंद्रकान्ता और अलिफ लैला देख के खुद को तुर्रम ख़ान समझा करते थे , खेल कोई सा भी दे दो लगानी सबको बौंड्री ही थी .बस एसी हाइ पिच एनर्जी युवा दौर मे 10वी निकलते ही जिंदगी का सबसे बड़ा सवाल सामने था - "बेटा Maths या Bio" .इतने प्‍यार से कभी मेरी मार्क शीट ना देखने वाले बापू ने मुझे अचानक अहसास दिलाया की मेरे लंबे वाले लगने का वक़्त आ गया है . हेड टेल करके डिसाइड किया की Maths ही ले लेते , वैसे भी "BIO तो वो लेते है जिनकी आर्ट्स अच्छी होती है " . आज मुड़ कर देखता हू तो लगता है , इतनी भी आर्ट्स नही चाहिए थी ,शायद मैं ओवर एस्टिमेट कर गया था बिल्कुल वैसे ही जैसे अमेरिका पाकिस्तान को , चाइना North korea और कॉंग्रेस को अब तक पप्पू को .


खैर उन दिनो का दौर ही ऐसा था की आपका बच्चा अगर IIT की coaching ना करे तो मतलब आप ने उसे गोद लिया है . घर पर इतनी इज़्ज़त तो थी अपनी कि
 3 coaching सेंटर से हमने GST भर दिया था . आज तक उसका रिटर्न भर रहे है.

इंजिनियर बने तो कुछ दीनो तक रौब रहा परिवार का पहला इंजिनियर हू, कुछ समय मे अहसास मे हुआ अपनी कॉलोनी का 10वा बकरा हू जो हलाल होने के बाद खुद मट्न शॉप ढूँढ रहा है .

इंजिनियर बनने के फ़ायदे रिश्तेदारो को बहुत होते है , मसलन किसी के घर जाओ तो फ्रिड्ज ,कूलर मूह खोलके इधर ही देखते थे जैसे बस मेरी बेइज़्ज़ती कराने के लिए ही ये मॅन्यूफॅक्चर हुए थे Lucknow मे. आज कल तो लोग आधा कटा हुआ "APPLE" फोन लेके आ जाते है , एक दौर था जब "Maths ली है तो लड़का टॅलेंटेड ही होगा " ग़लतफमी मे शर्मा अंकल ने अपना Made in Nepal - Landline फोन और अपने Made in India बेटा का career मेरे हाथ मे दे दिया .भगवान का शुक्र है , फोन तो सही हो गया था...

Saturday, September 16, 2017

इंडिकेटर : ट्रूली सेक्युलर


भारत एक आधुनिक देश है आज, लेकिन जो परंपरा हमने आज भी "इंडिकेटर" को दे रखी है वो आलोकनाथ जी पर भी गहरी छाप छोड़ती है. विशव्स्त सूत्रो के अनुसार, जिस तरह से हम "इंडिकेटर " को बेटी मान कर उसके "शो ऑफ- प्रदर्शन" पर पूरी रोक लगते है , "संस्कार- देव" आलोकनाथ जी भी अगरबत्ती मे "इंडिकेटर" लगा के ही पूजा करते है .

क्या है ये "इंडिकेटर" ?
इंडिकेटर - ये वो तकनीकी यन्त्र है, जिसने हम भारतीयो को सच मायने मे "ट्रूली सेक्युलर" बना रखा है .
अपने वाहन को चलाते समय इस यंत्र को ना हम "राइट" मे प्रयोग करते है , ना "लेफ्ट " मे . मतलब ना "शाह" जी का कमल और ना "रेस्ट ऑफ ऑपोसिशन" का ठुल्लु. एकदम "रेड बुल " वाला चिल .


ये वो यंत्र है जिसके लिए शाहरुख ख़ान का "चक दे" फाइनल मोमेंट (या अल्लाह ,ये ना तो लेफ्ट है और ना राइट) भी फेल हो जाए .लड़किया तो जाने दीजिए ,लड़के भी इस महा यंत्र का उपयोग करने मे शरम करते है . सुना है नासा वाले भी सूरज तक वन वे डाइरेक्ट सेटिलाइट भेज रहे है , इस इंडिकेटर के साथ .  

हालाकी, विदेशो मे इस यंत्र की इतनी बेइज़्ज़ती होती है की चाच्चा पूछो ही मत .
ससुरे हर गली मोहल्ले मे इंडिकेटर दिखा दिखा कर रौब झाड़ते है. शुक्रा है हम भारतीयो का ,की हम कभी घमंड नही करते . भाई साब , इत्तु सा भी नही .दूसरे की बाइक की हेडलाइट जली हो तो हम सीधे गला फाड़ के बता देते है उसको ,मगर कभी राइट टाइम पर राइट इंडिकेटर यूज़ हम नही कर सकते.

एक चाच्चा मिले थे चौराहे पर . बोल रहे थे मुगलो के काल से इस यंत्र पर "परदा" लगा हुआ है. अब सब मोदी जी पर है - कब ये "ट्रिपल परदा " पूरी तरह से हटा पाते हैं. वही बगल मे पंडित जी ने बताया की इस यंत्र के प्रयोग से "शनि" मंगल के साथ दूसरे घर के छत पर बैठ सकता है जो "गुरु" के लिए ठीक नही ..या ऐसा ही कुछ , याद नही सही से .उमर हो गयी है हमारी, लॅपटॉप चलाते चलाते शायद.
खैर जाने दीजिए , आपको आप बीती सुनते है -
आज ही हम अपनी मारुति कार को लेकर मार्केट गये .लोगो का इतना प्यार ,इतना प्यार भाइयो कि - कार को कार से, बाइक से,हाथ से टच कर लिए मगर मज़ाल थी की इंडिकेटर पर आँच भी आने देते. ना अपना इंडिकेटर ऑन किए और ना हमरे इंडिकेटर की लाइट की तरफ नज़र उठा कर देखे - अद्भुत.

हम थोड़े आउटडेटेड थे सो थोड़ा सा इंडिकेटर यूज़ कर लिए,सीट बेल्ट बाँध लिए . 
५०० मीटर दूर से ही सफेद वर्दी मे साहेब ने ताड़ लिए की बकरा तो नया है शहर मे- क़ानून का इतना पालन . अपराध तो किए थे हम- महा अपराध . मतलब एक सभ्या समाज मे जहा लोग गर्भ मे पल रही कन्या को समाज मे आना भी शर्मनाक मानते हो , ऐसे समाज मे इंडिकेटर का इस्तेमाल तो घोर निंदनीय है.


ये लास्ट लाइन इस स्पॉन्सर्ड बाइ "मोदी जी" , बाकी सब अपना ही है .
फिर मिलेंगे अगले चौराहे पर , जै इंडिकेटर !

~ "अखंड 'आशु' "