भारत एक आधुनिक देश है आज, लेकिन जो परंपरा हमने आज भी "इंडिकेटर" को दे रखी है वो आलोकनाथ जी पर भी गहरी छाप छोड़ती है. विशव्स्त सूत्रो के अनुसार, जिस तरह से हम "इंडिकेटर " को बेटी मान कर उसके "शो ऑफ- प्रदर्शन" पर पूरी रोक लगते है , "संस्कार- देव" आलोकनाथ जी भी अगरबत्ती मे "इंडिकेटर" लगा के ही पूजा करते है .
क्या है ये "इंडिकेटर" ?
इंडिकेटर - ये वो तकनीकी यन्त्र है, जिसने हम भारतीयो को सच मायने मे "ट्रूली सेक्युलर" बना रखा है .
अपने वाहन को चलाते समय इस यंत्र को ना हम "राइट" मे प्रयोग करते है , ना "लेफ्ट " मे . मतलब ना "शाह" जी का कमल और ना "रेस्ट ऑफ ऑपोसिशन" का ठुल्लु. एकदम "रेड बुल " वाला चिल .
ये वो यंत्र है जिसके लिए शाहरुख ख़ान का "चक दे" फाइनल मोमेंट (या अल्लाह ,ये ना तो लेफ्ट है और ना राइट) भी फेल हो जाए .लड़किया तो जाने दीजिए ,लड़के भी इस महा यंत्र का उपयोग करने मे शरम करते है . सुना है नासा वाले भी सूरज तक वन वे डाइरेक्ट सेटिलाइट भेज रहे है , इस इंडिकेटर के साथ .
हालाकी, विदेशो मे इस यंत्र की इतनी बेइज़्ज़ती होती है की चाच्चा पूछो ही मत .
ससुरे हर गली मोहल्ले मे इंडिकेटर दिखा दिखा कर रौब झाड़ते है. शुक्रा है हम भारतीयो का ,की हम कभी घमंड नही करते . भाई साब , इत्तु सा भी नही .दूसरे की बाइक की हेडलाइट जली हो तो हम सीधे गला फाड़ के बता देते है उसको ,मगर कभी राइट टाइम पर राइट इंडिकेटर यूज़ हम नही कर सकते.
एक चाच्चा मिले थे चौराहे पर . बोल रहे थे मुगलो के काल से इस यंत्र पर "परदा" लगा हुआ है. अब सब मोदी जी पर है - कब ये "ट्रिपल परदा " पूरी तरह से हटा पाते हैं. वही बगल मे पंडित जी ने बताया की इस यंत्र के प्रयोग से "शनि" मंगल के साथ दूसरे घर के छत पर बैठ सकता है जो "गुरु" के लिए ठीक नही ..या ऐसा ही कुछ , याद नही सही से .उमर हो गयी है हमारी, लॅपटॉप चलाते चलाते शायद.
खैर जाने दीजिए , आपको आप बीती सुनते है -
आज ही हम अपनी मारुति कार को लेकर मार्केट गये .लोगो का इतना प्यार ,इतना प्यार भाइयो कि - कार को कार से, बाइक से,हाथ से टच कर लिए मगर मज़ाल थी की इंडिकेटर पर आँच भी आने देते. ना अपना इंडिकेटर ऑन किए और ना हमरे इंडिकेटर की लाइट की तरफ नज़र उठा कर देखे - अद्भुत.
हम थोड़े आउटडेटेड थे सो थोड़ा सा इंडिकेटर यूज़ कर लिए,सीट बेल्ट बाँध लिए .
५०० मीटर दूर से ही सफेद वर्दी मे साहेब ने ताड़ लिए की बकरा तो नया है शहर मे- क़ानून का इतना पालन . अपराध तो किए थे हम- महा अपराध . मतलब एक सभ्या समाज मे जहा लोग गर्भ मे पल रही कन्या को समाज मे आना भी शर्मनाक मानते हो , ऐसे समाज मे इंडिकेटर का इस्तेमाल तो घोर निंदनीय है.
ये लास्ट लाइन इस स्पॉन्सर्ड बाइ "मोदी जी" , बाकी सब अपना ही है .
फिर मिलेंगे अगले चौराहे पर , जै इंडिकेटर !
~ "अखंड 'आशु' "
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